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भानगढ़ किले का इतिहास !भानगढ़ किले का रहस्य ! History of Bhangarh Fort! Mystery of Bhangarh Fortin Hindi

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Contents:

  1. भानगढ़ का किला कहां पर स्थित है:
  2. भानगढ़ किले का रहस्य
  3. भानगढ़ का सच
  4. भानगढ़ किले की कहानी
  5. भानगढ़ किल्ले तक जाने का बस,रेल और बयुसेवा

भानगढ़ का किला कहां पर स्थित है(Where is Bhangarh Fort situated)

भारत सबसे बड़े धार्मिक देशों में से एक है ! यहां विभिन्न प्रकार के धर्मों के लोगों के साथ-साथ विभिन्न धर्म को मानने वाले लोग भी निवास करते हैं ! भारतीय राज्य राजस्थान अपने भीतर की विविधताओं के लिए पूरे विश्व भर में विख्यात है, चाहे वह विविधता भौतिक स्थिति की हो या फिर सांस्कृतिक विकास की ! राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भानगढ़ किला अपने रोचक इतिहास अद्भुत कलाकृति और भूतिया लोकोक्तियों के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है ! तो चलिए आज हम इसी भानगढ़ किले का इतिहास के ऊपर एक नजर डालते है !

भानगढ़ किले का रहस्य(Mystery of Bhangarh Fort)

भानगढ़ प्रसिद्ध किले का निर्माण वर्ष 1573 इसबी में आमेर के राजा भगवान दास ने करवाया था ! यह किला अपने निर्माण के बाद लगभग तीन शताब्दियों तक काफी सक्रिय रहा ! परंतु उसके बाद थोड़ा निष्क्रिय होने लगा ! प्रसिद्ध मुगल सम्राट अकबर के नौ रत्नों में शामिल और भगवान दास के छोटे बेटे अंबर, आमिर के महान मुगल सेनापति मानसिंह के छोटे भाई राजा माधव सिंह ने अगले 1623 इसबी में अपना स्थान बना लिया था ! माधव सिंह के बाद उसके पुत्र छत्रसिंघ ने यहां के शासन व्यवस्था को अपने नियंत्रण में ले लिया और शासन करने लगा ! 

विक्रम संवत के अनुसार 1722 ईसवी में इस वंश के हरि सिंह ने यहां के शासन की गद्दी संभाली ! इसके साथ ही भानगढ़ की चमक धीरे-धीरे ढलने लगा ! छत्र सिंह के बेटे अजब सिंह ने भानगढ़ के समीप स्थित आजमगढ़ का निर्माण भी करवाया था !मोघल सम्राट औरंगजेब के शासन के दौरान उसने हिंदुओं पर बहुत अत्याचार किए थे, जिस कारण दबाव में आकर हरि सिंह के दोनों बेटों ने इस्लाम को अपना लिया था, जिन्हें बाद में मोहम्मद पुलीज एवं मोहम्मद दहलीज के नाम से जाना गया !

इन दोनों भाइयों ने मुसलमान बनने एवं औरंगजेब के शासन पर पकड़ ढीली होने पर जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह ने इन्हें मारकर औरंगजेब के शासन पर कब्जा कर लिया ! और फिर भानगढ़ किल्ला महाराजा सवाई जयसिंह का हो गया, तथा  इसके बाद सवाई जयसिंह राजा ने माधव सिंह के वंशज को भानगढ़ के किले की सत्ता सौंप दी थी !

भानगढ़ का सच(truth of BhanGarh)

इस भव्य किले का निर्माण 1573 ईसवी में आमिर के प्रसिद्ध शासक राजा भगवान दास जी द्वारा कराया गया था ! यह विश्व प्रसिद्ध किला भारतीय राज्य राजस्थान के अलवर जिले में अरावली पर्वत श्रंखला के ऊपर बनाया गया है ! जो इसे एक विशेष प्रकार की सुरक्षा और मनमोहक दृश्य भी प्रदान करती है ! 

यह किला भारतीय राजधानी दिल्ली से मात्र 235 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ! जिस कारण इस किले को देखने के लिए पर्यटकों को ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है !

ऐसा माना जाता है कि भानगढ़ किले के प्रसिद्ध शासक माधव सिंह की मौत के बाद उनके छोटे बेटे छतर सिंह ने भानगढ़ किले का राजा का पद संभाला था ! जिसकी मृत्यु 1630 ईस्वी में एक युद्ध के दौरान हो गई थी ! वर्ष 1720 ईसवी में भानगढ़ राज्य और उसे किले को आमेर के राजा जयसिंह द्वारा जबरन अपने राज्य में मिला लिया गया था ! 

भानगढ़ जब आमेर राज्य से मिला तो यह किल्ला धीरे-धीरे उड़ने लगा,जल्द ही यहां पानी की कमी हो गई, जिस कारण वर्ष 1783 में यह अकाल आगया, जिसके बाद यह इलाका पूरी तरह से उजड़ गया था !

इस किले को स्थानीय लोगों द्वारा भूतिया किला कहा जाता है ! जिस कारण प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है !इसके प्रमुख संरचनाओं में बहुत सारी चीजें प्रसिद्ध है, जैसे इस के प्रसिद्ध मंदिर जिनमें भगवान सोमेश्वर मंदिर, गोपीनाथ मंदिर, मंगला देवी मंदिर और केशवराय मंदिर प्रमुख है !
भागड़ किले के मनमोहक मंदिर 

भानगढ़ किले की कहानी(Story of Bhangarh Fort)

इस भव्य और ऐतिहासिक किले के बारे में स्थानीय लोगों द्वारा कुछ भूतिया बातें की जाती रहती है ! जिसे ध्यान में रखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा वहां पर यात्रा के नियम तैयार किए गए हैं !जिस कारण यहां सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले भ्रमण करने की अनुमति नहीं है !

इस किले को स्थानीय लोगों द्वारा भूतिया किला कहा जाता है ! जिस कारण प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है !इसके प्रमुख संरचनाओं में बहुत सारी चीजें प्रसिद्ध है, जैसे इस के प्रसिद्ध मंदिर जिनमें भगवान सोमेश्वर मंदिर, गोपीनाथ मंदिर, मंगला देवी मंदिर और केशवराय मंदिर प्रमुख है ! 

भानगढ़ किल्ले तक जाने का बस,रेल और बयुसेवा

भानगढ़ किले तक वायु सेवा द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है ! इसका सबसे नजदीकी हवाई पतन जयपुर में स्थित संत वेदर एयरपोर्ट है, जोकि किले से मात्र 56 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ! यहां से आप सड़क परिवहन का उपयोग करके किल्ले तक आसानी से पहुंच सकते हैं !

 इसके इलावा रेलवे की सुविधा द्वारा भी पहुंचा जा सकता है, क्योंकि इसका सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन दौसा रेलवे स्टेशनहै जो किल्ले से मात्र 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है !

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