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शकुनी(महाभारत) को स्वर्ग की प्रति क्यों मिली थी !Why did Shakuni(Mahabharat) get the copy of Heaven

शकुनी महाभारत के एक ऐसे पात्र हैं जिसे लोग शक की नजर से ही देखते हैं ! शक किसी गलत काम का नहीं बल्कि षड्यंत्र का, शकुनी को महाभारत में हमेशा षड्यंत्र करते हुए ही दिखाया गया है ! जैसे ही महाभारत के प्रत्येक पात्र की अपने आप में ही एक कहानी है ! वैसे ही शकुनि की भी अपनी एक कहानी है, जिसे बहुत ही कम लोग जानते हैं ! कहते हैं कि हालात इंसान को किसी भी हद तक गिरने में मजबूर कर देते हैं !आपको इस लेख की अंत में यह भी जानने को मिलेगा की  इतने पाप करने के बाद भी शकुनि स्वर्ग क्यों मिला !

शकुनि(महाभारत) को स्वर्ग की प्रति क्यों मिली थी



कहानी शुरू होती है गांधार नगरी से जो आज के समय में अफगानिस्तान के कंधार के नाम से प्रसिद्ध है ! जो राजा सुबल का राज्य था, जो गांधारी और शकुनि के पिता थे ! एक दिन राजा सुबल एक यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें कई पंडित और बाहर ऋषिओं को भी आमंत्रित किया गया ! यज्ञ में एक ज्योतिषी भी पहुंचे जिसने राजा सुबल को यह बताया कि उनकी बेटी गांधारी की किस्मत में एक ग्रह दोष चढ़ा हुआ है, जिस कारण जिस से भी उसका भीवहां होगा वह भी विवाह से कुछ देर बाद ही मारा जाएगा ! 

राजा सुबल यह सुन काफी दुखी हुए, गांधारी जो राजा सुबल की इकलौती बेटी थी और उन्हें बहुत ही प्यारी भी थी ! गांधारी के भविष्य को सुधारने के लिए राजा ने उनका विवाह एक बकरे से कर दिया और फिर उस
बकरे की बलि चढ़ा दी गई, ताकि उनकी बेटी के सिर से यह दोष हट जाए !

गांधारी जो राजा सुबल की इकलौती बेटी थी और उन्हें बहुत ही प्यारी भी थी ! गांधारी के भविष्य को सुधारने के लिए राजा ने उनका विवाह एक बकरे से कर दिया और फिर उस बकरे की बलि चढ़ा दी गई, ताकि उनकी बेटी के सिर से यह दोष हट जाए !अब गांधारी के सिर से यह  दोष हट गया था, कम से कम उनके परिवार वालों को तो यही लगा था ! 

कुछ समय बाद गांधारी का विवाह हस्तिनापुर के महाराज धृतराष्ट्र से हुआ,जो राजा पांडु के अंधे भाई थे  !गांधारी जो गांधार में अपनी सुंदरता के लिए जानी जाती थी, खासतौर पर उनकी सुंदर आंखों के लिए ने गांधारी विवाह के पश्चात उसे अंधकार में धकेल दिया था, जिसमें धृतराष्ट्र जीरहा था ! इस बात से शकुनी बिल्कुल भी खुश नहीं था !

सकुनी(महाभारत) को स्वर्ग की प्रति क्यों मिली थी !Why did Sakuni(Mhabharat) get the copy of Heaven
धृतराष्ट्र और गांधारी 

सब कुछ ठीक रहता अगर धृतराष्ट्र को गांधारी के पहले विवाह के बारे में नहीं पता चलता! परन्तु वह दिन भी आ गया जब धृतराष्ट्र को अपनी पत्नी गांधारी के पहले विवाह के बारे में पता चला, उसे ऐसा लगा कि उसके साथ विश्वासघात हुआ है ! 

वह हस्तिनापुर का अपराजित और अजय चक्रवर्ती महाराज था ,आखिर उसे कोई कैसे मुर्ख बना गया ! वह इसे बर्दाश्त नहीं कर सका और राजा सुबल और उसके पूरे परिवार को काल कोठरी में डाल दिया और उन सभी को यह सजा दी गई थी की उनके पूरे 100 सदस्यों के परिवार को दिन में केवल एक बार एक मुट्ठी अन्न खाने को ही दिया जाए !

एक मुट्ठी अन्न से भला पूरे परिवार का पेट कैसे भरता, यह जानबूझकर ही यह दंड दिया गया था, ताकि वह सभी भूक से मारे जाए !  राजा सुबल ने यह सोचा कि अगर मैंने अभी कुछ नहीं किया तो मेरा पूरा परिवार ही मर जाएगा, तो उसने एक उपाय सोचा कि हर एक दिन अगर किसी एक को एक मुट्ठी अनाज खाने को मिल जाए तो वह जिंदा बच जाएगा ! इस प्रकार उसका कुल खत्म नहीं होगा ! 

लेकिन वह कौन होगा खुद राजा सुबल, उनका बड़ा बेटा या अन्य कोई ! तो राजा सुबल ने अपने बेटों की परीक्षा लेने के लिए सोचा, यह जानने के लिए कि उनमें से सबसे ज्यादा बुद्धिमान कौन है और जो अपने पूरे परिवार का बदला ले सके ! क्योंकि वह जानता था, कि उसका समय अब आ गया है ! सुबल ने कुछ सोचा और एक हड्डी ली और हड्डी में से एक धागा डालने को अपने पूरे परिवार के सदस्य को कहा !

लेकिन सभी इस काम में विफल रहे ! लेकिन शकुनि ने धागे की एक तरफ अन्न बांधा दूसरी ओर से चींटी को, अन्न को  पीछा करते चींटी एक से दूसरी ओर चली गई और चींटी के साथ ही धागा भी हड्डी के एक तरफ से दूसरी तरफ चला गया ! इस तरह सबसे छोटे राजकुमार शकुनि ने अपनी बुद्धिमानी दिखाई और पूरे परिवार में से वह बच गई !

इसे भी पढ़ें -''अधर्म करने के वाद भी दुर्योधन और कौरवों को स्वर्ग में स्तान क्यों मिली''

सकुनी ने एक-एक करके अपने सारे भाइयों को मरते हुए देखा और अंत में राजा सुबल जब अपने अंतिम समय गिन रहे थे तो उन्होंने धृतराष्ट्र से शकुनी को आजाद कराने की विनती की और धृतराष्ट्र ने शकुनि को आजाद करा दिया और इसके बाद यह धृतराष्ट्र की सबसे बड़ी गलती कहलाए !

शकुनि के बुद्धि द्वारा ही महाभारत के युद्ध में कौरवों को धकेला गया ! शकुनि ने वह किया जिसके लिए उसे जिंदा रखा गया था, अपने बंश के विनाश का बदला लेने के लिए और अंत में पांडवों द्वारा धृतराष्ट्र के एक भी पुत्र को नहीं बख्शा गया ! 

शकुनी को कोई भी एक अच्छे इंसान के रूप में नहीं देखता, पर यह कहा जाता है कि शकुनि को अंत में स्वर्ग नसीब हुआ था, क्योंकि शकुनि ने अपने मकसद को पूरा करने के लिए अपनी जान भी दे दी थी और जो कुछ भी उसने किया वह अपने परिवार और गांधारी के साथ हुए अन्याय के चलते किया ! यह ही नहीं एक सुन्दर मंदिर भी शकुनि के सम्मान में केरल राज्य में बनाया गया था !

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