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Revolt of 1857 in hindi |1857 का विद्रोह हिंदी में

ब्रिटिश भारत का 1857 विद्रोह, जिसे सिपाही विद्रोह या प्रथम स्वतंत्रता संग्राम भी कहा जाता है, 1857-59 में भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ व्यापक विद्रोह देखने को मिला था  लेकिन कुछ करोणो  की बजह से असफल हो गया था। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेवा में भारतीय सैनिकों (सिपाहियों) द्वारा मेरठ में शुरू किया गया, यह विद्रोह दिल्ली, आगरा, कानपुर और लखनऊ तक फैल गया। भारत में इसे अक्सर स्वतंत्रता का पहला युद्ध और अन्य कई  नाम से जाना जाता था । यह भारत का ब्रटिश ईस्ट इंडिया के खिलाफ प्रथम ससस्त्र संग्राम था !

revolt of 1857 in hindi !
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 1857 के विद्रोह के कारण [causes of revolt of 1857]

भारत में अंग्रेज़ों की नीतिओं के कारण ,1820 शदाब्दी की मध्य मोदी से ही राजाओं और नवाबों की ताकत  छीनने लगी थी ! उनकी श्रद्धा और सम्मान दोनों खत्म होते जा रहे थे ! बहुत सारे दरबारों में रेजिडेंट तैनात किए गए थे ! स्तानीय शासकों की स्वतंत्रता घटती जा रही थी ! उनकी सेनाओं को भंग किया गया था ! उनके राजस्व वसूली के अधिकार और इलाके के एक-एक करके छीने जारहे थे !बहुत सारी स्थानीय शासकों ने अपने हितों की रक्षा के लिए कंपनी के साथ बातचीत भी की ! 

जैसे झांसी की रानी लक्ष्मीबाई चाहती थी, कि कंपनी उनके पति की मृत्यु के बाद उनके गोद लिए हुए बेटे को राजा की दर्ज़ा मिले  ! पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने भी कंपनी से आग्रह किया कि उनके पिता को जो पेंशन मिलते थे वह मृत्यु के बाद उन्हें प्राप्त हो  ! 

अपनी श्रेष्ठता और सैनिक ताकत के नशे में चूरईस्ट इंडिया कंपनी ने इन निबेदनो को ठुकरा दिया !भारत के आखरी रजोड़ि रियासत अवध भी  अंग्रेजो के कब्जे में चली गयी 1 1801 में अबाध पर एक सहायक संधि जबरन थोपी गयी और 1856 में अंग्रेजों ने उसे अपने कब्जे में ले लिया ! गवर्नर जनरल डलहौजी ने ऐलान कर दिया कि रियासत का शासन ठीक से नहीं चलाया जा रहा है ! इसलिए शासन को दुरुस्त करने के लिए, ब्रिटिश प्रभुत्व जरूरी है ! जिसका मतलब अंग्रेज सभी रियासतों पर अपना कब्जा चाहते थे !

कंपनी ने मुगलों के शासन को खत्म करने की भी पूरी योजना बना ली थी ! अब कंपनी द्वारा जारी किए गए सिक्कों पर से मुगल बादशाह का नाम हटा लिया गया था !1849 में गवर्नर जनरल डलहौजी ने ऐलान किया, कि बहादुरशाह जफर की मृत्यु के बाद, बादशाह के परिवार को लाल किले से निकालकर उसे दिल्ली में कहीं और बसाया जाएगा ! 

1856 में गवर्नर जनरल चार्ल्स  कैनिंग ने फैसला किया कि बहादुर शाह जफर आखिरी मुगल बादशाह होंगे ! उनकी मृत्यु के बाद उनके किसी भी वंशज को बादशाह नहीं माना जाएगा !उन्हें केवल राजकुमारों के रूप में मान्यता दी जाएगी ! इस तरह अंग्रेजों ने एक-एक कर रियासतों और साम्राज्य का अंत किया और अपने स्वामित्व पूरे भारत में स्थापित कर लिया !

किसान और सैनिक के बीच असंतोष का कारण [Reason for dissatisfaction between farmer and soldier]

गांव में किसान और जमीदार भारी-भरकम लगान और वसूली के सख्त तौर तरीकों से परेशान थे ! बहुत सारे लोग महाजनों से लिया कर्ज नहीं लौटा पा रहे थे ! इसके कारण उनकी पीढ़ियों पुरानी जमीन हाथ से निकलती जा रही थी ! कंपनी के तहत काम करने वाले भारतीय सिपाहियों के असंतोष की अपनी वजह थी !वह अपने वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों के कारण परेशान थे ! कई नए नियम उनकी धार्मिक भावनाओं और आस्थाओं को ठेस पहुंचाते थे ! आपको जानकर हैरानी होगी, कि उस समय बहुत सारे लोग समुद्र पार नहीं जाना चाहते थे ! उन्हें लगता था, कि समुद्री यात्रा से उनका धर्म और जाति भ्रष्ट हो जाएंगे !

जब सन 1824 में सिपाहियों को कंपनी की ओर से लड़ने के लिए समुद्र के रास्ते वर्मा जाने का आदेश मिला तो उन्होंने इस हुक्म को मानने से इनकार कर दिया !हालांकि उन्हें जमीन के रास्ते से जाने एतराज  नहीं था ! सरकार का हुक्म ना मानने के कारण उन्हें सख्त सजा दी गयी ! क्योंकि यह मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ था !

इसलिए सन 1856 में कंपनी को एक नया कानून बनाना पड़ा ! इस कानून में साफ कहा गया था, कि अगर कोई व्यक्ति कंपनी की सेना में नौकरी करेगा, तो जरूरत पड़ने पर उसे समुद्र पार भी जाना पड़ सकता है ! इसके अलावा सिपाही गांव के हालात से भी परेशान थे ! बहुत सारे सिपाही खुद भी किसान थे ! वह अपने परिवार और गांव को छोड़ कर आए थे ! लिहाजा किसानों का गुस्सा जल्दी ही सिपाहियों में भी फैल गया !

सुधारों पर विरोध [Protest against reforms ]

अंग्रेजों को लगता था कि भारतीय समाज को सुधारना जरूरी है सती प्रथा को रोकने और विधवा विवाह को बढ़ावा देने के लिए कानून बनाए गए ! अंग्रेजी भाषा की शिक्षा को जमकर प्रोत्साहन दिया गया ! 1830 के बाद कंपनी ने ईसाई मिशनरियों को खुलकर काम करने और यहां तक की जमीन व संपत्ति जुटाने की भी आजादी दे दी थी ! 

साल 1850 में एक नया कानून बनाया गया ! जिससे ईसाई धर्म को अपनाना और आसान हो गया ! इस कानून में प्रावधान किया गया था , कि अगर कोई भारतीय व्यक्ति ईसाई धर्म अपनाता है, तो पुरखों की संपत्ति पर उसका अधिकार पहले जैसा ही रहेगा ! अंग्रेजों की नीतियों से बहुत सारे भारतीयों को यकीन हो गया था, कि अंग्रेज उनका धर्म और उनकी सामाजिक रीति रिवाज और परंपरागत जीवन शैली को नष्ट कर रहे हैं !

सिपाही विद्रोह कहाँ से शुरू हुआ [Where did the soldier uprising start ]

हालांकि शासक और प्रजा के बीच संघर्ष कोई नई बात नहीं है ! लेकिन कभी-कभी यह संघर्ष इतनी फैल जाते हैं कि राज्य की सत्ता छींन -भिन्न हो जाते है ! भारत के उत्तरी भागों में सन1857 में ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई थी ! फतेह और शासन के 100 साल बाद ईस्ट इंडिया कंपनी को एक भारी विद्रोह से जूझना पड़ रहा था ! मई 1857 में शुरू हुई इस बगावत ने भारत में अंग्रेजों के अस्तित्व को ही खतरे में डाल दिया था ! मेरठ से शुरू हुई यह बगावत आगे चलकर भारत के अलग-अलग शहरों तक फैल गई ! समाज के विभिन्न तबकों के असंख्य लोग विद्रोही तेवरों के साथ उठ खड़े हुए ! कुछ् लोगों का मानना हे,की 19वी सदी में उपनिवेशवाद के खिलाफ दुनिया भर में यह सबसे बड़ा ससत्र संघर्ष था

1857 के विद्रोह के प्रभाव [Effects of the Revolt of 1857]

मेरठ से दिल्ली तक] 29 मार्च 1857 को युवा सिपाही मंगल पांडे को बैरकपुर में अपने अफसरों पर हमला करने के आरोप में फांसी पर लटका दिया गया ! चंद दिनों बाद मेरठ में तैनात कुछ सिपाहियों ने नए कारतूसों के साथ फौजी अभ्यास करने से इंकार कर दिया ! सिपाहियों को लगता था, कि उन कारतूसों के ऊपर गाय और सुअर की चर्बी का लेप चढ़ाया गया था ! इसके चलते 85 सिपाहियों को नौकरी से निकल दिया गया ! उन्हें अपने अफसरों का हुक्म ना मानने के आरोप में 10, 10 साल की सजा भी सुना दी गई !

9 मई 1857 की बात है,मेरठ में तैनात दूसरे भारतीय सिपाहियों की जबरदस्त प्रतिक्रिया दिखाई ! 10 मई 1857 को सिपाहियों ने मेरठ की जेल पर धावा बोलकर वहां बंद सिपाहियों को आजाद करा लिया ! उन्होंने अंग्रेज अफसरों पर हमला करके, उन्हें मार गिराया ! इसके अलावा उन्होंने बंदूक और हथियार भी अपने कब्जे में ले लिए ! और अंग्रेजों की इमारतों औ संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया ! 

उन्होंने अंग्रेज़ों के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया ! सिपाही पूरे देश में अंग्रेजों के शासन को खत्म करने पर आमादा हो गए ! लेकिन उनके मन में सवाल यह था, कि अंग्रेजों के जाने के बाद देश का शासन कौन चलाएगा ! सिपाहियों ने इसका भी जवाब ढूंढ लिया था, मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर को फिर से देश की सत्ता सौंपना चाहते थे 

मेरठ सिपाहियों की एक टोली 10 मई की रात को घोड़ों पर सबर होकरअंधेरे में ही दिल्ली पहुंच गए ! जैसे ही उनके आने की खबर फैली दिल्ली में तैनात टुकड़ियों ने भी बगावत कर दिआ ! उनके द्वारा यहां भी कई अंग्रेज अफसर मारे गए ! देसी सिपाहियों ने हथियार और गोला-बारूद अपने कब्जे में ले लिया ! उन्होंने इमारतों को आग लगा दी और  इसके बाद सिपाही लाल किले की दीवारों के आसपास जमा हो गए ! वह बादशाह से मिलना चाहते थे !

बादशाह अंग्रेजों की भारी ताकत से दो-दो हाथ करने यार नहीं थे ! लेकिन सिपाही भी अड़े रहे ! आखिरकार वे जबरन महल में घुस गए और उन्होंने बहादुर शाह जफर को अपना नेता घोषित कर दिया !बृद्ध बहादुरशाह जफ़र को सिपाहियों की मांग माननी पड़ी ! उन्होंने देश भर के शासकों और मुखियाओं को चिठ्ठी लिखकर अंग्रेजों से लड़ने के लिए भारतीय राज्यों का एक संघ बनाने का आव्हान किया ! बहादुर शाह जफर के एकमात्र कदम के गहरे परिणाम सामने आए !

अंग्रेजों से पहले देश के एक बहुत बड़े हिस्से पर मुगल साम्राज्य का ही शासन था ! ज्यादातर शासक और रजवाड़े मुगल बादशाह के नाम पर ही अपने लाखों का शासन चलाते थे ! अंग्रेजी शासन के विस्तार से भयभीत ऐसे बहुत सारे शासकों को लगता था, कि अगर मुगल बादशाह दोबारा शासन स्थापित कर लें,तो वे मुगल आधिपत्य में दोबारा अपने लाखों का शासन बेफिक्र होकर चला पाएंगे !

उधर अंग्रेजों को इतने बड़े विद्रोह की उम्मीद नहीं थी ! उन्हें लगता था कि कारतूसों के मुद्दे पर पैदा हुई उथल-पुथल कुछ समय में ही शांत हो जाएगी ! लेकिन जब बहादुर शाह जफर ने बगावत को अपना समर्थन दे दिया, तो स्थिति रातोंरात बदल गई !

अक्सर ऐसा होता है, कि जब लोगों को उम्मीद की नई किरण दिखने लगती है, तो उनका उत्साह और साहस बढ़ जाता है ! इससे उन्हें आगे बढ़ने की हिम्मत, उम्मीद और आत्मविश्वास मिलता है ! 

revolt of 1857 in hindi !

1857 के विद्रोह के स्वरूप [Nature of the Revolt of 1857]

[बगाबत पहलने लगी ] जब दिल्ली से अंग्रेजों के पैर उखड़ गए, तो लगभग एक हफ्ते तक कहीं और विद्रोह नहीं हुआ ! जाहिर हे की खबर फैलने में भी कुछ समय तो लगना ही था ! लेकिन इसके बाद तो विद्रोह का सिलसिला ही शुरू हो गया ! एक के बाद एक रेजिमेंट में सिपाहियों ने विद्रोह कर दिया और वे दिल्ली, कानपुर और लखनऊ जैसे मुख्य बिंदुओं पर दूसरी टुकड़ियों का साथ देने निकल पड़े ! उनकी देखा देखी कस्बों और गांवों के लोग भी बगावत के रास्ते पर चलने लगे ! वह स्थानीय नेताओं, ज़मींदारों और मुखियों के पीछे संगठित हो गए ! यह लोग अपनी सत्ता स्थापित करने और अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए तैयार थे 1`

स्वर्गीय पेशवा बाजीराव के दत्तक पुत्र नानासाहेब कानपुर के पास रहते थे उन्होंने सेना को संगठित किया और अंग्रेजों को शहर से खदेड़ दिया ! उन्होंने खुद को पेशवा घोषित कर दिया और ऐलान किया, कि वह बादशाह बहादुर शाह जफर के तहत गवर्नर है ! लखनऊ की गद्दी से हटा दिए गए नवाब वाजिद अली शाह के बेटे बिरजिस कद्र को नया नवाब घोषित कर दिया गया ! बिरजिस कदर ने भी बहादुर शाह जफर को अपना बादशाह मान लिया ! उनकी मां बेगम हजरत महल ने अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह को बढ़ावा देने में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया ! 

झांसी में रानी लक्ष्मीबाई भी अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोही सिपाहियों के साथ जा मिली ! उन्होंने नाना साहब के सेनापति तांत्या टोपे के साथ मिलकर अंग्रेजों को भारी चुनौती दी ! मध्यप्रदेश के मंडला क्षेत्र में राजगढ़ की रानी अवंती बाई लोधी ने 4000 सैनिकों की फौज तैयार की और अंग्रेजो के खिलाफ उसका नेतृत्व किया ! क्योंकि ब्रिटिश शासन ने उनके राज्य के प्रशासन पर भी नियंत्रण कर लिया था ! विद्रोही टुकड़ियों के सामने अंग्रेजों की संख्या बहुत कम थी,जिसकी बजह से बहुत सारे मोर्चों पर उनकी जबरदस्त हार हुई ! इससे लोगों को यकीन हो गया, कि अब अंग्रेजों का शासन खत्म हो चुका है !

अब लोगों को विद्रोह में कूद पड़ने का गहरा आत्मविश्वास मिल गया था ! खासतौर से अवध के इलाके में चौतरफा बगावत की स्थिति थी ! 6 अगस्त 1857 को लेफ्टिनेंट कर्नल टाइटलर ने अपने,कमांडर इन चीफ को टेलीग्राम वीजा ! जिसमें उसने अंग्रेजों के भय को व्यक्त किया था ! उसने लिखा- हमारे लोग विद्रोहियों की संख्या और लगातार लड़ाई से थक गए हैं ! एक-एक गांव हमारे खिलाफ है, जमीदार भी हमारे खिलाफ हो चुके हैं !

अहम् बात यह था, इस दौरान बहुत सारे महत्वपूर्ण नेता सामने चुके थे ! जैसे  फैजाबाद के मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने भविष्यवाणी कर दी थी, कि अंग्रेजों का शासन जल्दी ही खत्म हो जाएगा ! वह समझ चुके थे कि जनता क्या चाहती है ! इसी आधार पर उन्होंने अपने समर्थकों की एक विशाल संख्या बना लिया !  अपने समर्थकों के साथ वह  अंग्रेजों से लड़ने लखनऊ जा पहुंचे ! दिल्ली में अंग्रेजों का सफाया करने के लिए बहुत सारे गाजी यानी धर्म योद्धा इकट्ठा हो गए !

बरेली के सिपाही बक्त खान ने लड़ाकू की एक विशाल टुकड़ी के साथ दिल्ली की ओर रबना हो गए ! वह इस बगावत में एक मुख्य व्यक्ति साबित हुए ! बिहार के पुराने जमीदार कुंवर सिंह ने भी विद्रोही सिपाहियों का साथ दिया और महीनों तक अंग्रेजों के साथ लड़ाई लड़ी ! तमाम इलाकों के नेता और लड़ाके इस युद्ध में हिस्सा ले रहे थे ! 

1857 के विद्रोह के स्वरूप

अंग्रेजों का पलटवार [British Reversal 1857] 

स उथल-पुथल के बावजूद अंग्रेजों ने हिम्मत नहीं छोड़ी,ब्रिटिश कंपनी ने पुरे ताकत लगा कर इस विद्रोह को कुचल ने का प्रयाश किया ! उन्होंने इंग्लैंड से और फौजी मंगवाए, विद्रोहियों को जल्दी सजा देने के लिए नए कानून और विद्रोह के मुख्य केंद्रों पर धावा बोला गया ! सितंबर 1857 में दिल्ली दोबारा अंग्रेजो के कब्जे में आ गई ! अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई ! उनके बेटों को उनकी आंखों के सामने गोली मार दी गई ! बहादुर शाह जफर और उनकी पत्नी बेगम जीनत महल को अक्टूबर 1818 को रंगून जेल में भिजवा दिया गया ! इसी जेल में 1862 में बहादुर शाह जफर ने अपनी अंतिम सांस लिया !

दिल्ली पर अंग्रेजो का कब्जा हो जाने के बाद इसका यह मतलब नहीं था, कि विद्रोह खत्म हो चुका था ! इसके बाद भी लोग अंग्रेजों से टक्कर लेते रहे ! व्यापक बगावत की विशाल ताकत को कुचलने के लिए अंग्रेजों का अगले 2 सालों तक लड़ाई लड़नी पड़ी ! मार्च 1858 में लखनऊ अंग्रेजो के कब्जे में चला गया ! जून 1858 में रानी लक्ष्मीबाई की हार हुई और उन्हें मार दिया गया ! दुर्भाग्यवश ऐसा ही रानी अवंती बाई लोधी के साथ भी हुआ ! खेड़ी की शुरुआती विजय के बाद उन्होंने अपने आपको अंग्रेजी फौज से घिरा पाया और वह शहीद हो गई !

तांत्या टोपे मध्य भारत के जंगलों में रहते हुए, आदिवासियों और किसानों की मदद से छापामार युद्ध चलाते रहे ! जिस तरह पहले अंग्रेजो के खिलाफ मिली सफलताओं से विद्रोहियों को उत्साह मिला था, उसी तरह विद्रोही ताकतों की हार से लोगों की हिम्मत टूटने लगे ! बहुत सारे लोगों ने विद्रोहियों का साथ छोड़ दिया ! अंग्रेजों ने भी लोगों का विश्वास जीतने के लिए हर संभव प्रयास किए ! 
उन्होंने वफादार भू-स्वामियों के लिए इनामों का ऐलान कर दिया ! उन्हें आश्वासन दिया गया, कि उनकी जमीन पर उनके परंपरागत अधिकार बने रहेंगे ! जिन्होंने विद्रोह किया था, उनसे कहा गया कि अगर वे अंग्रेजों के सामने समर्पण कर देते हैं और अगर उन्होंने किसी अंग्रेज की हत्या नहीं की है, तो वह सुरक्षित रहेंगे ! उनकी जमीन पर उनके अधिकार और दावेदारी बनी रहेगी ! इसके बावजूद सैकड़ों सिपाहियों, विद्रोहियों, नवाबों, और राजाओं पर मुकदमे चलाए गए और उन्हें फांसी पर लटका दिया गया ! 

1857 के विद्रोह के परिणाम [Consequences of 1857 rebellion]

अंग्रेजों ने 1859 के आखिर तक देश पर दोबारा नियंत्रण पा लिया था ! लेकिन अब वह पहले वाली नीतियों के सहारे शासन नहीं चला सकते थे ! अंग्रेजों ने जो अहम बदलाव किए थे, वह इस प्रकार थे !

  • ब्रिटिश संसद ने 1858 में एक नया कानून पारित किया और ईस्ट इंडिया कंपनी के सारे अधिकार ब्रिटिश साम्राज्य के हातों  में सौंप दिया ! ताकि भारतीय मामलों को ज्यादा बेहतर ढंग से संभाला जा सके !
  • ब्रिटिश मंत्रिमंडल के एक सदस्य को भारत के मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया ! उसे भारत के शासन से संबंधित मामलों को संभालने का जिम्मा सौंपा गया ! 
  • उसे सलाह देने के लिए एक परिषद का गठन किया गया ! जिसे इंडिया काउंसिल कहा जाता था ! 
  • भारत के गवर्नर जनरल को वायसराय का औदा दिया गया !इस प्रकार उसे इंग्लैंड के राजा रानी का निजी प्रतिनिधि घोषित कर दिया गया !फलस्वरूप अंग्रेज सरकार ने भारत के शासन की जिम्मेदारी सीधे अपने हाथों में ले ली ! 
  • देश के सभी राजाओं को भरोसा दिया गया, कि भविष्य में कभी भी उनके क्षेत्र पर कब्जा नहीं किया जाएगा ! 
  • उन्हें अपनी रियासत अपने वंशजों को यहां तक की दत्तक पुत्रों को सौंपने की छूट दे दी गई ! लेकिन उन्हें इस बात के लिए भी प्रेरित किया गया, कि वह ब्रिटेन की रानी को अपना अधिपति स्वीकार करें ! 

इस तरह भारतीय शासकों को ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन शासन चलाने की छूट दे दी गई ! सेना में भारतीय सिपाहियों का अनुपात कम करने और यूरोपीय सिपाहियों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया गया ! यह भी तय किया गया कि अवैध, बिहार, मध्य भारत, और दक्षिण भारत से सिपाहियों को भर्ती करने की बजाय अब गोरखा, सीखो और पठानों में से ज्यादा सिपाही भर्ती किए जाएंगे ! अंग्रेजों ने फैसला किया, कि वे भारत के लोगों के धर्म और सामाजिक रीति-रिवाजों का सम्मान करेंगे ! 

भूस्वामी और जमीदारों की रक्षा करने तथा जमीन पर उनके अधिकारों को स्थायित्व देने के लिए कानून बानी गयी ! इस प्रकार 1857 के इतिहास का एक नया चरण शुरू हुआ !

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