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हिमालय के ऊपर से विमान क्यों नहीं उड़ाए जाते हैं !

हिमालय पर्वत प्रकृति की एक बिशालकाय दिवार ! भारत देश को ना केबल ठण्ड से रक्ष्या करती है बल्कि बाहरी सस्त्रुओं से भी करोड़ों सालों से बचाती आयी है ! हिमालय पर्वत की लम्बाई 2400 किलोमीटर और चौड़ाई लगभग 200 किलोमीटर है ! दोस्तों इस पर्वत की एक महत्पूर्ण रहस्य है की ''हिमालय के ऊपर से विमान क्यों नहीं उड़ाए जाते हैं'' ! इसके पीछे  सठिक और बैज्ञानिक कारन छुपी हुई है !

दरअसल हिमालय की छोटी समताप मंडल यानि [stratosphere] को छूती है ! समताप मंडल [stratosphere]  यानि यहां हवा और ऑक्सीजन [अम्लजान ] दोनों स्तर काफी काम है ! और हवाई जहाज हिमालय के ऊपर गुजरने की कॉसिश करता है तो संताप मंडल को स्पर्श करती हुई जाना पड़ेगा ,जिसका मतलब है हवाई जहाज को हवा की मदद काम हो जाएगी और केबिन के अंदर ऑक्सीजन [अम्लजान ] की  मात्रा भी काम हो जाएगी ! और एहि वह बजह है की  ''हिमालय के ऊपर से विमान क्यों नहीं उड़ाए जाते हैं'' !

हिमालय के ऊपर से विमान क्यों नहीं उड़ाए जाते हैं [Why are planes not flown over the Himalayas]

इंडिया का एयर रूट नेटवर्क कभी भी हिमालय के ऊपर से नहीं गुजरता !क्यों की हर प्लेन का Cruising Altitude [ऊँचाई पर चढ़ना] यानी कि जिस एल्टीट्यूड पर प्लेन यूजुअली फ्लाई करते हैं, वह लगभग 35000 फीट [10,700 METRES ]  होता है ! और माउंट एवरेस्ट की हाइट लगभग 290 फीट [8,850 METRES] है !हालांकि हवाई जहाज  माउंट एवरेस्ट से भी करीब 6000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते हैं, लेकिन ऐसे कुछ भौगोलिक परिस्थितिओं की  वजह से हवाई जहाज या प्लेन्स  हिमालय के ऊपर से उड़ना काफी खतरनाक हो सकता है !

दरअसल जब हवाई जहाज 35000 फीट के ऊपर उड़ान कर रहे होते हैं, तो उस समय हवाई जहाज के बाहर का प्रेशर हमारे वायुमंडलीय [Atmospheric] प्रेशर की मात्रा का एक-चौथाई होता है और तापमान [Temperature] लगभग -50 डिग्री सेल्सियस होता है !लेकिन हवाई जहाज को पूरी तरह सील कर के अंदर का तापमात्रा और प्रेशर नॉरमल मेंटेन किया जाता है ! ऐसे केस में अगर किसी भी वजह से हवाई जहाज की डोर में कोई प्रॉब्लम आ जाए या फिर किसी छोटी टक्कर की वजह से अंदर का प्रेशर भी कम होना शुरू हो जाए तो सबसे पहले यात्रियों की ऑक्सीजन मास्क गिरा दिए जाते हैं, जिसकी मदद से आप 15 से 20 मिनट तक आसानी से सांस ले सकते हो ! 

और इसी 15 से 20 मिनट में पायलट को Altitude [ऊंचाई] को 35000 फीट से लगभग 8000 फीट तक लेकर आना होता है, जहां बाहर का प्रेशर नॉर्मल रहता है ! लेकिन अगर हवाई जहाज  हिमालय के ऊपर से उड़ रहा होगा और ऐसी परिस्थितियां बनती है, तो पायलट चाह कर भी उसे 15 से 20 मिनट में इतनी कम ऊंचाई तक नहीं ला पाएगा ! जिसकी बजह से हवाई जहाज की केबिन में ऑक्सीजन खत्म होने के बाद वहां मौजूद इंसानों का क्या होगा यह आप सोच सकते है !

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