नारी की उत्पत्ति कैसे हुई ?stri ki rachna kaise hui ?

इस दुनिया की सबसे अजीब कोई पहेली है तो वह है स्त्री !स्त्री को समझ ना पुरुष तो क्या साक्षात भगवान के भी बस में नहीं है !स्त्री की रचना किसने की ? माना जाता है कि भगवान ने स्त्री  जाति को बहुत ही फुर्सत में बनाया था ! हिंदू पौराणिक ग्रंथों में इस बात का जिक्र मिलता है; कि भगवान ब्रह्मा ने इस पूरी सृष्टि को केवल एक ही दिन में बना दिया था ! पर जब वह स्त्री की रचना कर रहे थे तो उन्हें इस कार्य को पूरा करने में 7 दिनों से भी अधिक समय लगा !



नारी की रचना कैसे हुई 


लेकिन फिर भी उनकी रचना अधूरी ही थी ! अंततः थक हार कर प्रतीक्षा में बैठे दूतों के सब्र का बांध टूट गया ! उन्होंने आखिरकार भगवान से पूछ ही लिया, कि भगवान आपने इस पूरे संसार को यहां तक कि ब्रह्मांड की असीमित रचना भी पलक झपकते ही कर दी थी; लेकिन आपको स्त्री की रचना करने में इतना समय क्यों लग रहा है !






नारी की उत्पत्ति कैसे हुई ?stri ki rachna kaise hui ?
stri ki rachna kaise hui ?




भगवान ने कहा यह मेरी अब तक की सबसे अनूठी रचना है ! यह बहुत ही अद्भुत है ! यह मेरी वह रचना है जो विकट से विकट हालात में डती रहती है ! चाहे कैसी भी परिस्थिति हो ! यह सब को खुश रख सकती है और ना केवल अपने बच्चों को बल्कि पूरे परिवार को एक साथ प्यार दे सकती है ! इस प्रकार से इस में विकट से विकट परिस्थिति को संभालने की शक्ति होती है ! यह एक-साथ कई कार्य कर सकती है और अपनी दुलार से छोटी मोटी खर्चों से लेकर बड़े से बड़े घाव भी भर सकती है ! थके होने पर भी यह लगातार भिन्न कार्य कर सकती है और बीमार होने पर भी यह अपना स्वयं देखभाल रख सकती है !


इतना सब सुनकर देवदूत चकित रह गए और आश्चर्य से पूछ बैठे; कि भगवान यह सब कुछ कह दो हाथों से कर पाना संभव है ! इस पर भगवान ने कहा कि मत भूलो बच्चों ;यह मेरी अब तक की बनाई गई रचनाओं में से सबसे अद्भुत पर सबसे श्रेष्ठ रचना है ! इसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है !


यह सुनकर देवदूत और भी उत्साहित हो गए ! पास जाकर भगवान के इस रचना को हाथ लगा कर देखने लगे ! लेकिन हाथ लगाते ही देवदूत बोले भगवान यह तो बहुत ही नाजुक है !इस पर भगवान बोले- वह सिर्फ देखने में ही नाजुक है ! अपितु मैंने इसके अंदर उसी में शक्ति धैर्य और साहस भर दिया है !इतना सुन कर देशदूत स्त्री  के अनुपम रूप में खो गए और टकटकी लगाकर उसे निहारने लगे ! स्त्री के मुख पर कुछ  गील! सा लगा जिज्ञासा से बोले, कि भगवान इस गाल तो गीले है ! ऐसा है इस के नेत्र में से कुछ बह रहा है !


स्त्री की सबसे बड़ी ताकत 

भगवान कहा -यह इसकी आंसू है !जो इसकी सबसे बड़ी ताकत है ! इसके आगे पत्थर भी पिघल जाते हैं ! लेकिन ये आंसू स्त्री को प्यार जताने और अकेलापन दूर करने का दरिया भी बनते हैं !जब वह दुखी होती है तो रोती है; और साथ ही खुश होती है तो और भी अधिक रोती है !


भगवान का यह कथन सुनकर देवदूत फिर से पूछा-भगवान क्या स्त्री जाती सोच भी सकते हैं ?  इस पर भगवान ने कहा; कि हां यह सोच भी सकती है और मजबूत मुकाबला भी कर सकती है ! इतना सुनकर देवदुत ने पूछा- भगवान आपकी रचना अदभुत है !  आप में इसे बहुत ही फुर्सत में बनाया है तथा यह संपूर्ण है !लेकिन भगवान बोले कि नहीं, यह संपूर्ण नहीं है ! इसमें एक त्रुटि है ! इतने गुण धर्म होने के बावजूद भी यह स्वयं अपनी महत्ता से अनभिज्ञ अनजान रहेगी ! 



नारी की सम्मान :

इसमें कोई संदेह नहीं है कि नारी जाति ईश्वर की अब तक की सबसे सुंदर अद्भुत रचना है !  दुनिया का प्रत्येक पुरुष किसी ना किसी रूप में नारी पर ही आश्रित है ! चाहे वह मां हो, पत्नी हो, या मित्र हो ! नारी का कोई भी रूप हो कैसा भी रूप हो, यदि पुरुष नारी का सम्मान करता है; तो वह सदैव सुखी रहता है ! जैसे साक्षात भगवान शिव शक्ति के बिना अधूरे हैं !


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